धरती का स्वर्ग – केदारनाथ | Heaven on Earth – Kedarnath

धरती का स्वर्ग – केदारनाथ | Heaven on Earth – Kedarnath

हिन्दू धर्म में चार धाम यात्रा को सबसे पवित्र यात्रा माना जाता है. रामेश्वरम,द्वारका,जगन्नाथ पुरी और केदारनाथ व बद्रीनाथ यह महत्वपूर्ण चार धाम है. चार धामों में सबसे कठिन यात्रा केदारनाथ धाम की मानी जाती है. सावन के महीने में हर कोई द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए जाना चाहता है. शिवजी के मनपसंद महीने सावन में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ हमेशा देखी जाती है. इन दिनों हर कोई केदारनाथ के दर्शन करना चाहता है,तो आइएँ हम जानते है केदारनाथ के बारे में. केदारनाथ जाने के लिए कौन-से महत्वपूर्ण पड़ाव होते है जानते है.

१. चौराबाड़ी ताल, केदारनाथ

हिमालय की चोटी पर स्थित यह तालाब अप्रतिम दृश्यों में से एक है. इसे गांधी सरोवर या गांधी ताल भी कहा जाता है. केदारनाथ मंदिर से ३ किलोमीटर की दूरी पर यह ताल स्थित है. केदारनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित इस ताल का वास्तविक नाम कांति ताल बताया जाता है. सन १९૪८ में गांधीजी की कुछ अस्थियों का विसर्जन इस ताल में किया था,जिसके कारण इसका नाम गांधी ताल हुआ. विद्वानों द्वारा कहा जाता है कि चौराबाड़ी वो जगह है जहाँ शिवजी ने सप्तऋषियों को ज्ञान दिया था. समुद्र तल से ३९०० मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील चौराबाड़ी ग्लेशियर से निकलती है. आप यही पास में स्थित भैरव मंदिर के भी दर्शन कर सकते है.

२. गौरीकुंड, केदारनाथ

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार,गौरीकुंड एक सबसे पवित्र स्थल है,जहाँ गर्म पानी का कुंड है और इसमें डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु यहाँ आते है. मनोरम दृश्यों से घिरा, गौरीकुंड प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर ट्रेक का शुरुआती बिंदु है. यह झरना हिमालय के गढ़वाल में लगभग ६,००० फीट की ऊंचाई पर स्थित है. श्रद्धालु यहाँ देवी पार्वती को समर्पित गौरी देवी मंदिर भी जाते है. ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहाँ देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक तपस्या की थी. यह क्षेत्र भगवान गणेश द्वारा हाथी का सिर प्राप्त करने की कथा से भी जुड़ा हुआ है. 

३. केदारनाथ, केदारनाथ

चारधामों में से एक केदारनाथ हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत करता है. भगवान शिव को समर्पित ३,५८૪ मीटर ऊंचे इस तीर्थस्थान तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्री एक कठिन लेकिन भक्तिमय यात्रा करते है. केदारनाथ भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है,इसीलिए इसे सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है. गर्भगृह में एक शंक्वाकार चट्टान की संरचना है जिसे भगवान शिव के सदाशिव (हमेशा शुभ) रूप के रूप में पूजा जाता है. १,००० वर्ष पुराना यह मंदिर एक आयताकार मंच पर व्यवस्थित विशाल पत्थर की पट्टियों से बना है. भीतरी दीवारों पर हिंदू पौराणिक कथाओं के विभिन्न देवताओं और दृश्यों की मूर्तियां है. ऐसा कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण ८वीं शताब्दी में ऋषि आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया था और पिछले कुछ वर्षों में इसमें कई नवीकरण हुए है. हर साल नवंबर में भगवान शिव की मूर्ति को केदारनाथ मंदिर से उखीमठ में स्थानांतरित कर दिया जाता है क्योंकि सर्दियों के दौरान पूरा मंदिर बर्फ से ढक जाता है. मई में केदारनाथ में मूर्ति की पुनः स्थापना की जाती है. 

૪. शंकराचार्य समाधी, केदारनाथ

केदारनाथ मंदिर के पीछे आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि स्थित है, आदि गुरू शंकराचार्य ने भारत में चार धामों की स्थापना की थी,जो हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र तीर्थ है. शंकराचार्य समाधि केदारनाथ के सबसे लोकप्रिय पर्यटन आकर्षणों में से एक है. कहा जाता है कि आठवीं शताब्दी में शंकराचार्य केदारनाथ आए थे और उन्होंने केदारनाथ मंदिर का निर्माण किया और अपने चार मठों में से एक की स्थापना की. मान्यता है कि गर्म पानी का झरना शंकराचार्य द्वारा बनाया गया था, जहां उनके शिष्य क्षेत्र की चरम जलवायु परिस्थितियों से राहत पाने के लिए आते है. 

५. त्रियुगी नारायण मंदिर, केदारनाथ

त्रियुगी नारायण वह मंदिर है जहाँ भगवान शिवजी और पार्वतीजी का विवाह हुआ था. माना जाता है कि मंदिर के सामने जलती हुई अखंड ज्वाला इस उल्लेखनीय विवाह की साक्षी है. यह मंदिर केदारनाथ मंदिर की तरह ही दिखता है. इसके गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक चांदी की मूर्ति है, साथ ही देवी लक्ष्मी, भगवान बद्रीनारायण, देवी सीता, भगवान रामचन्द्र और भगवान कुबेर की मूर्तियाँ भी है. मंदिर के सामने रखी ब्रह्म शिला विवाह के स्थान को सटिकता से दर्शाती है. मंदिर परिसर में तीन पवित्र तालाब भी स्थित हैं जिन्हें रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहा जाता है. अपने औषधीय गुणों के लिए जाने वाले इस तालाब का पानी मुख्य सरस्वती कुंड से प्राप्त होता है. ऐसी मान्यता है कि सरस्वती कुंड का पानी भगवान विष्णु की नाभि से निकलता है. त्रियुगीनारायण मंदिर के ठीक बाहर पंचनामा देवताओं को समर्पित एक और छोटा मंदिर है. मंदिर से २ किमी की पैदल दूरी आपको देवी गौरी को समर्पित एक गुफा तक ले जाती है. प्रति वर्ष अगस्त और सितंबर माह के दौरान इस मंदिर में एक वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है. 

६. वासुकी ताल, केदारनाथ

समुद्र तल से ૪,१५० मीटर की ऊंचाई पर स्थित वासुकी ताल एक शांत झील चौखंबा चोटियों और मंदाकिनी घाटी का शानदार दृश्य प्रस्तुत करती है. केदारनाथ से वासुकी ताल तक का ट्रेक एक बेहतरीन ट्रेक है. पहली बार ट्रेक करने वालों के लिए गौरीकुंड से झील तक ट्रेकिंग करना थोड़ा कठिन काम हो सकता है. केदारनाथ से वासुकी ताल तक का सफर एक दिन में आसानी से पूरा किया जा सकता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माना जाता है कि भगवान विष्णु ने रक्षा बंधन के शुभ त्योहार पर वासुकी ताल में स्नान किया था.

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